प्रिया
जन्म- दिन की
ढेर-सारी शुभकामनाएं
आए –गए
वेग कितने
इस छोटे –से
जीवन में ।
टकराए वे
अदम्य उत्साह से
उससे
रही
खड़ी
वह
मुस्कराती
अपने घर के
दरवाजे पर ।
कर्म
तप
सार
जीवन का –
यह सीखा
अपने
वर्तमान से।
और धूप-छाँव को
गले लगाया
सुखद बनाया
जीवन को ।
सौम्य-
शालीनता
की
प्रतिमा
मोहित करती है
सबको
सामंजस्य के
गहरे रंग से।
नपा-तुला
सम्भाष्ण उसका
प्रिय लगता है
सबको ।
पर
मौन उसका तो
और प्रखर है!
यों वह
बिटिया है मेरी
पर
नारी का
गौरव है वह
!

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